विगत दिनों बातें अभिनेता की आवाज और उच्चारण को लेकर हुई।इसी कड़ी में हमने सोचा कि क्यों ना आज संवाद संप्रेषण में स्ट्रेस पॉइंट की ही बात की जाये। स्ट्रेस अर्थात दबाव।कई बार अभिनेता अपनी आवाज़ पर बहुत मेहनत करता है। शब्द के उच्चारण भी सही होते हैं। आरोह अवरोह भी सही होते हैं।परंतु सही शब्द पर दबाव या स्ट्रेस नहीं पड़ने से अभिनेता जो संवाद संप्रेषित कर रहा है उसका अर्थ ही बदल जाता है।
ऐसा कैसे हो सकता है... लेखक ने जो लिखा है, निर्देशक ने जो निर्देश दिया है उसके आधार पर हम संवाद बोल रहे हैं। उसी वाक्य का अर्थ कैसे बदल सकता है ?बदल सकता है जनाब !उदाहरण के लिए आप कोई भी एक वाक्य लीजिए और अलग-अलग शब्दों पर दबाव देकर बोलकर देखिए!
चलिए उदाहरण के लिए एक वाक्य लेते हैं : -
'मुझे आज उनसे मिलना है!'
अब इस वाक्य को अलग -अलग शब्दों पर दबाव डालकर देखते हैं उसका अर्थ क्या हो जाता है...
1."मुझे"आज उनसे मिलना है
इसमें मुझे शब्द पर दबाव देने से अर्थ यह निकलता है वो मिले या ना मिले 'मुझे' उनसे मिलना है!
2.मुझे"आज"उनसे मिलना है
अर्थ- और कभी नहीं,"आज" मिलना है!
3.मुझे आज"उनसे"मिलना है
अर्थ- किसी और से नहीं "उनसे" ही मिलना है!
4.मुझेआज उनसे"मिलना है"
अर्थ- वो ना मिलना चाहें तो भी मुझे "मिलना" ही है!
देखा आपने... वाक्य वही है परंतु अलग-अलग शब्दों पर स्ट्रेस या दबाव डालने से उसी वाक्य का अर्थ बदल जाता है। इसलिए अपनी स्क्रिप्ट में हर वाक्य में सही शब्द को इनवाइटेड कॉमा या अंडरलाइन करके, उस पर स्ट्रेस देकर बोलिए तो सही अर्थ संप्रेषित होगा!
मो० निज़ाम(पथ)जमशेदपुर
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