Friday, April 23, 2021

कला की अभिव्यक्ति

ज़िन्दगी में जब हम(आम लोग) ज़िंदगी की जद्दोज़हद से जूझते हुए या फिर मानसिक थकान अनुभव करते हैं तो कला की ओर उन्मुख होते हैं। वहीं जब कोई कलाकार पीड़ा याअवसाद में होता है तो वह भी कला की ओर उन्मुख होता है । 
पहले का कदम मन के सहज सुख के लिए और दूसरे का चेतना की अभिव्यक्ति के लिए  । 
हां, कला दोनों को आकर्षित करती है । कला के कारण ही दोनों के मध्य संवाद स्थापित हो पाता है । संवाद स्थापित हो जाने के बीच जिस माध्यम का प्रयोग किया जाए वो संचार कहा जाता है।    
           आज कोराेना के विषम काल में मूर्त और अमूर्त कला दोनों ही संचार के डिजिटल माध्यम पर निर्भर है और बहुते हद तक माध्यम ही हावी  है । उक्त  माध्यम में कला रंगत में तो है, लेकिन वह ऊर्जा,भावना और उमंग कहीं गुम हो गई है । हम आज महज़ बाहरीआवरण को हीअनुभव करते हैं, उसकी अभिव्यक्ति को नहीं।निश्चित ही लोग आज डिजिटल युग में कम ख़र्च में लुत्फ ज़्यादा पा रहे हों, पर प्राप्त सुख की मीमांसा नहीं कर रहे। ऊपरी आवरण का सुख ऊपरी तुष्टि भले दे सकता हो मगर अंतरमन की भूख जीवंत व  चेतन अभिव्यक्ति से ही संभव है। 
कलाकार और दर्शक दोनों को संचार से पहले सरोकार पर ध्यान केंद्रित करना होगा,वर्ना दोनों ही उपभोकता मात्र ही रह जाएंगे। कलाकार और रसिक दोनों ही "प्रोडक्शन" के जाल में उलझे हैं बनिस्बत इसके कि  वह क्रियेशन और उसके प्रभाव के विषय में सोचें । 
       साथियों, इस विचार के माध्यम से मैं ब्लॉग की शुरुआत कर रहा हूं आप सब लोग इससे जुड़ें, अपनी प्रतिक्रिया दें, प्रोत्साहन दे, विषय सुझायें ताकि हम इसे निरंतर जारी रख सकें। धन्यवाद!

10 comments:

  1. एक बार फिर से हमें रंग कर्म की पथ पर अग्रसर करने के लिए, और प्रेरित करने लिए धन्यवाद सर🙏🙏🙏🙏

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  2. क्या बात है sir बहुत ही सुंदर, हम सभी कलाकारों के लिए आप पथ सजा रहे है शुक्रिया बहुत बहुत।

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  3. Bahut Nizam bhai yeh ek sachi khidmat haye rang karm ki waah

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  4. बहुत अच्छा प्रयास है सर

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