Saturday, April 24, 2021

अभिनेता की आवाज़ भाग-1

           हमारे कई रंगकर्मी साथी समय-समय पर अलग-अलग विषय पर ब्लॉग लिखने की मांग करते रहें हैं। सबसे बड़ी समस्या मेरे साथ रहेगी लेखन के विषय को लेकर रही है। नाटक पर तो लिखने और बोलने के लिए ढेर सारे विषय हैं। विषय जब मिल जाए तो फिर जटिलता आती है उसके शुरुआत की' क्योंकि शुरुआत तक बहुत दिक्कत है। कैसे की जाए बात, कैसे की जाए शुरुआत। इस बार मैंने सोचा कि नाटक पर लिखी बहुत सारी ऐतिहासिक,पौराणिक  ग्रंथों या बातों से परे कुछ ऐसा लिखा जाए जो अभिनेताओं के जीवन में उपयोगी सिद्ध हो। क्योंकि मैंने नाटक करते वक्त, नाट्य महोत्सव में देखे गए नाटकों को देखते वक्त, प्रतियोगिताओं में निर्णायक की हैसियत से बैठकर नाटकों को देखते वक्त... बेहतरीन अभिनेताओं को आवाज़ के बेहतर उपयोग के बिना मंच पर लड़खड़ाते हुए देखा है, चरित्र से बाहर जाकर हास्यास्पद बनाते हुए देखा है।बावजूद इसके कि उनका शरीर पात्र के लायक है, वेशभूषा भी ठीक-ठाक है, यहां तक कि चेहरे की और शरीर की भाव भंगिमायें भी बिलकुल अच्छी तरह से आ रहीं हैं। लेकिन आवाज़ के आरोह अवरोह का सही ज्ञान है, ना श्वास पर नियंत्रण। इसकी वजह से कई अभिनेता सचमुच में बेहतर अभिनय करते हुए भी पात्रों को जीवंत करने में लड़खड़ा जाते हैं। आज लिखने से पहले मैंने सोचा क्यों न लेख के माध्यम से किसी अभिनेता के आवाज़ के इस्तेमाल और श्वास पर नियंत्रण की ही बात की जाये। संवाद अगर आपकी सही है,आपकी आवाज़ भारी रही है, आपके उच्चारण दुरूस्त हैं, आपके नियंत्रण में है, आपकी आवाज में दम है तो आप के अभिनय में ना सिर्फ चार चांद लग सकता है, बल्कि आपके व्यक्तित्व को भी बहुत प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
           बहुत सारे कलाकार यह नहीं जानते की आवाज़ को दुरुस्त करने के लिए सबसे पहले उन्हें अपनी सांस को नियंत्रित करना होगा। सही ढंग से सांस लेने की प्रक्रिया से हर रोज़ गुज़रना पड़ेगा। जिससे कि वह आगे चलकर अपने नियंत्रित सांसों द्वारा आवाज़ के उतार-चढ़ाव को जब जैसे चाहे इस्तेमाल कर सकेंI
 चलिए सांस को भीतर केंद्र तक लाने का अभ्यास शुरू करते हैं, जिससे बात ही नहीं हो, सांस से संवाद सध जाये।
अभ्यास के तरीक़े कल के ब्लॉग में...😊
                     - मो० निज़ाम (पथ),जमरोदपुर

8 comments:

  1. Humlogo ko apke kal ke blog ka intezar rahega.. dhanyawad 🙏

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  2. एक बहुत ही अच्छी शुरुआत है, आशा है कि आगे भी इस कड़ी को बनाए रखेंगे, और मंच से जुड़े कलाकारों को सही मार्गदर्शन करते रहेंगे। आपका साधुवाद 🙏🙏💐🙂

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  3. अच्छी शुरुआत...
    ,ऐसे यहां मैं एक बात इसके साथ जोड़ना पसंद करूँगा ।
    आवाज के उतार चढ़ाव के लिए ज़रूरी है चरित्र को दो रूपों में फील करना,ये वाह्य और आंतरिक मनोवैज्ञानिक के बीच से निकला इमोशन होगा,जो वास्तविक होगा तो आवाज तदनुरूप होगा...इसमें स्तनिस्लावस्की और माइकल चेखव के विचार अभिनय के संदर्भ में उल्लेखनीय है।

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  4. बहुत अच्छा प्रयास है सर

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  5. धन्यवाद सर🙏🙏

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  6. सही मार्गदर्शन

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