जैसा कि कल पहले भाग में मैंने कहा था कि आवाज के सही संप्रेषण तथा आरोह अवरोह के लिए हम भाग 2 में अभ्यास के बात करेंगे। यहां कुछ ऐसे अभ्यास की सजेशंस है जिसे आप प्रतिदिन अभ्यास में करतें हैं, तो निश्चित रूप से अभिनेता या अभिनेत्री की आवाज के संप्रेषण और आरोह अवरोह में मदद मिलेगी।
अभ्यास
अपना हाथ अपने पेट पर रखिए। आपका हाथ वहां आपके मस्तिष्क को फोकस करने भर के लिए नहीं है,बल्कि इसलिए है कि आप अपनी सांस कितनी गहरी लेना चाहते हैं। आपका हाथ वहां आपके पेट की मांसपेशियों की हरकत महसूस करने भर के लिए भी नहीं है, ना पेट दबाने खींचने के लिए; बल्कि सांस को नाभि तक ला कर आवाज़ को उर्जा से भरने के लिए है। चलिए अपने पेट को सांस से भर लें और 'जी'... की ध्वनि निकाले। फिर से सांस लें और इस बार बाहर निकालते हुए फ...की निकालें और सांस बाहर निकालने के बारे में जागृत रहें। दोहरायें... इस बार 'वी' की ध्वनि निकालें और अपने होठों पर कंपन मदासूस करें I फिर से सांस लेकर धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए अपने पैरों को एक दूसरे से कुछ अलग अलग करके खड़े हो जाइए। महसूस कीजिए कि आपकी पीठ शरीर से अलग छ्त की ओर खिंचा जा रहा है और आपकी पीठ को बाहर निकालता जा रहा है।
किसी भी तरह के तनाव के लिए दो-तीन बार बिना पैर जमीन से उठाएं अपने वजन को फर्श पर अनुभव करें। अपने सिर को हिलाए और अपने कंधों को हल्का महसूस करें। फर्श पर बैठ कर धीरे धीरे बोलिए। धीरे-धीरे लिए अपनी सीट का वजन जमीन पर महसूस करें। ज़मीन पर बैठ कर इस प्रकार की ध्वनि निकालें कि आपका मुंह 45 डिग्री पर रहे, तनाव रहित रहे॥अपने मुंह के आगे अपने हाथ रखें और खोलकर सांस बाहर निकालते हुए ऊ ... की ध्वनि निकालें I ऐसा करते हुए आपको कोई ज़ोर नहीं लगाना है। फिर से सांस भीतर ले ऊँ का उच्चारण करते हुए हर बार आपको ऐसा महसूस होना चाहिए कि सांसो के साथ बाहर निकलती आवाज़ आपके नाभि केंद्र से शुरू हो रहे हों । अब आपको आसानी हो तो इस एक्सरसाइज को घूमते हुए भी कर सकते हैं। यह सभी अभ्यास क्रम में होंगे, ताकि आप अपनी आवाज़ को केंद्रित कर जब आपको अपनी आवाज़ आती महसूस होने लगे तो इस अभ्यास को अपने अनुसार अनुकूल बना लीजिए।
याद रखें आवाज को मुक्त बनाने के लिए शारीरिक गतियां हमेशा मददगार होती हैं ।
अपने आवास के एक्सरसाइज को हमेशा कुछ ना कुछ पढ़कर ही खत्म करना चाहिए। कुछ ऐसा पढ़ना चाहिए जो ध्वनियात्मक हो,संवादात्मक होI शुरुआत आहिस्ता आहिस्ता पढ़ने से कीजिए और अपनी सांसो पर ध्यान दीजिए। सांसों के अंदर बाहर आने की क्रिया पर ध्यान दीजिए, उनको महसूस कीजिए और मज़बूती दीजिए। फिर अपनी गति बढ़ा दीजिए और फिर सहज ढंग से पढ़ना शुरू कीजिएI हर वाक्य में सही शब्द पर 'दबाव' डालकर वाक्य को पढ़ना शुरू कीजीए!
जब जिस जब किसी पात्र की तैयारी के लिए आवाज़ का इस्तेमाल करें तो उसकी उम्र, उसकी आर्थिक स्थिति, उसके आत्मविश्वास और चरित्र के अनुसार आवाज़ को संप्रेषित करने का प्रयास करें। हालांकि यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसको प्रैक्टिकल किए बिना सिर्फ लेख से समझना मुश्किल हैI
इसके अलावे अनुलोम-विलोम से,कपाल भाती से या हारमोनियम के साथ सरगम के अभ्यास से भी सांस और पिच पर नियंत्रण किया जा सकता है।
लेकिन उपरोक्त तीनों क्रियायें किसी के देख रेख में किया जाये तो ज़्यादा बेहतर होगा।
टी एस इलियट कहते हैं- हमेशा कोशिश करो। लेकिन इतनी कम कोशिश ना करो कि जो चाहते हो वह पूरा ना हो सके... और इतनी ज़्यादा कोशिश भी ना करो कि जितना चाहिए उससे ज़्यादा हो जाए। इसलिए सांस पर नियंत्रण के साथ आप अपनी आवाज़ और संवाद अदायगी के उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण पा सकते हैं। एक अच्छे अभिनेता के लिए सांस पर नियंत्रण की बहुत ज़रूरी है, जिससे संवाद अदायगी में उतार-चढ़ाव, सुर ,ताल, लय और संप्रेपणीयता आती है।