Friday, February 18, 2022

रंगमंच के पथ पर चल कर जीवन को जीने की कला

 


२. रंगमंच के पथ पर चल कर जीवन को जीने की कला। 

रंगमंच ज़िंदगी को ज़िंदगी की तरह जीने का मौका देता है। रंगमंच के पथ पर चलकर जीवन को जानने, समझने और जीने का हुनर आता है। एक रंगकर्मी के रूप में दूर खड़े होकर ख़ुद को भी एक विश्लेषक की नज़र से देख सकते हैं। हम देख सकते हैं अपनी ख़ूबियां और अपने ऐब भी। थिएटर से जुड़ा शख्स अपने जीवन को बहुकोणीय स्तर पर जाकर देख सकता है। रंगमंच का सम्मोहन अद्भुत है।इसमें जीवंतता है, जिंदगी को जिंदगी की तरह जीने की शिक्षा देता है!इंसानी जिंदगी के लिए जरूरी संवेदना को बनाए रखने में मददगार साबित होता है।वैचारिक क्रांति का माध्यम है नाटक...अपनी संस्कृति का रक्षक है नाटक...किसी विद्वान ने लिखा है कि किसी देश की समाज की संस्कृति को रहन-सहन को जीवन शैली को अगर जानना है तो वहां के 10 नाटक देखें इसी से नाटक के महत्व का पता चलता है।नाटक सामाजिक शिक्षा का सामाजिक बदलाव का रचनात्मक माध्यम है ।

डेवलपमेंट यानि विकास- अपने जन्म के समय से लेकर अब तक दुनिया भर में हुए बदलाव - मतलब सामाजिक बदलाव, राजनीतिक बदलाव और भौगोलिक बदला आर्थिक बदलाव और तकनीकी बदलाव का प्रभाव निश्चित रूप से रंगमंच के विकास पर भी पड़ा जैसे जैसे लोगों की सोच जैसे-जैसे आर्थिक परिस्थितियां बदली जैसे-जैसे तकनीकी महारत हासिल करते गए उसी तरह से वैचारिक स्तर पर, शैली के स्तर पर, प्रयोग के स्तर पर और तकनीकी स्तर पर हमारा रंगमंच और सशक्त हुआ है और जीवंत हुआ है।रंगमंच के इस डेवलपमेंट के साथ हमारे देश का कलात्मक और सांस्कृतिक रूप से विकास हुआ है और विश्व भर में मजबूत पहचान मिली है ।

No comments:

Post a Comment