Thursday, May 12, 2022

कोरोना चकित है...

          यूं तो आदतन मैं अपने ब्लॉग में कला या नाटक से जुड़ी बातें ही करता हूंI लेकिन आज कोरोना के दूसरे लहर के कारण जब मौत का तांडव हो रहा है,अपने देश में चारों ओर हाहाकार है। कहीं ऑक्सीजन की कमी से मरीज़् तड़प रहें हैं, तो कहीं डॉक्टर खुद बीमार हैं, ज़िंदगी बचाने के लिए सांसों की तलाश है। मौत इतनी तेज़ी से लोगों को अपने शिकंजे में कस रहा है कि श्मशान अपनी बारी के इंतज़ार अर्थियां पड़ीं हैं और कब्रिस्तान में जगह कम पड़ रहे हैं।लोग दहशत में और ग़मज़दा हैं...ज़िंदगी की आस में चीत्कार और गुहार लगा रहें हैं।
       ताज्जुब है कि ऐसे वक़्त में भी कई बुद्धिजीवी कहलाने वाले तथा कथित मानव - मानवता की रक्षा कैसे हो सोचना छोड़कर कुछ राज्यों के चुनावी नतीजों का विश्लेषण करते हुए सोशल मीडिया पर अपने अपने पसंदीदा पार्टीयों की "मौत को आमंत्रण" देने वाली रैलियों को बिसरा कर वोटों के प्रतिशतों का आकलन कर ख़ुद को श्रेष्ठ और दूसरों को नीचा दिखाने में लगें हुए हैं।कोरोना ख़ुद चकित है कि ये कैसे लोग हैं जो मेरी ख़ौफ़नाक़ उपस्थिति को नज़र अंदाज़ कर आपस में श्रेष्ठ होने की होड़ में लगें हैंI
        मानवता को शर्मसार करते इन विश्लेषकों से निवेदन है कि पहले मानव और मानवता बचा लें, फिर लोक तंत्र और श्रेष्ठ अश्रेष्ठ के विशेषज्ञ बनें तो हमारे देश के हित में होगा !

No comments:

Post a Comment